असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ हरिः ॐ तत्सत्॥
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Showing posts from May, 2026
असतो मा सद्गमय मंत्र: अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला दिव्य मंत्र | कब और कैसे करें जाप
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असतो मा सद्गमय मंत्र: अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला दिव्य मंत्र | कब और कैसे करें जाप असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ Roman Lyrics Asato Ma Sadgamaya Tamaso Ma Jyotirgamaya Mrityor Ma Amritam Gamaya Om Shantih Shantih Shantih असतो मा सद्गमय मंत्र का अर्थ (Meaning in Hindi) यह मंत्र Brihadaranyaka Upanishad से लिया गया एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र है। यह मनुष्य की आत्मिक यात्रा को दर्शाता है। पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ 1. असतो मा सद्गमय हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलें। 2. तमसो मा ज्योतिर्गमय मुझे अज्ञान और अंधकार से ज्ञान और प्रकाश की ओर ले चलें। 3. मृत्योर्माऽमृतं गमय मुझे मृत्यु और भय से अमरत्व तथा आत्मिक शांति की ओर ले चलें। 4. ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः तीनों स्त...
सुबह उठते ही बोले जाने वाले करदर्शन मंत्र का महत्व | पृथ्वी माता से क्षमा क्यों मांगी जाती है?
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सुबह उठते ही बोले जाने वाले करदर्शन मंत्र का महत्व | पृथ्वी माता से क्षमा क्यों मांगी जाती है? प्रातः स्मरण श्लोक सुबह की शुरुआत यदि सकारात्मक विचार, प्रार्थना और कृतज्ञता से हो, तो पूरा दिन शांत और शुभ माना जाता है। भारतीय सनातन परंपरा में सुबह उठते ही कुछ विशेष श्लोक बोलने की परंपरा रही है। इनमें सबसे प्रसिद्ध है “करदर्शन मंत्र” और “पृथ्वी वंदना श्लोक”। करदर्शन मंत्र कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ पृथ्वी वंदना श्लोक समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥ करदर्शन मंत्र का अर्थ इस श्लोक में कहा गया है कि हमारे हाथों के अग्रभाग में माता लक्ष्मी, मध्य भाग में माता सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास माना गया है। इसलिए सुबह उठते ही अपने हाथों का दर्शन करना शुभ माना जाता है। इसका संकेत क्या है? माता लक्ष्मी — धन, समृद्धि और सफलता माता सरस्वती — ज्ञान, बुद्धि और कला भगवान विष्णु — पालन, संतुलन और जीवन की स्थिरता अर्थात हमारे कर्म, ज्ञान और संतुलन ही जीवन को सफल बनाते हैं। सुबह ...
भक्ति सुर संगम का शुभ प्रारंभ श्री गणेश आरती के साथ
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गणेश जी आरती 🙏 भक्ति सुर संगम का शुभ प्रारंभ श्री गणेश आरती के साथ मैं “Bhakti Sur Sangam | भक्ति सुर संगम” का शुभ प्रारंभ भगवान श्री गणेश जी की पावन आरती के साथ करती हूँ। विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और प्रथम पूज्य श्री गणपति बप्पा का आशीर्वाद हम सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। आइए भक्तिभाव से गाएं श्री गणेश जी की दिव्य आरती — 🌺 जय गणेश देवा 🌺 जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया । बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा । लड्डुओं का भोग लगे, संत करें सेवा ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी । कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ ✨ गणेश आरती का महत्व श्री गणेश जी की आरती करने से जीवन की बाधाएँ दूर होत...